Thursday, April 23, 2020

तनाव रहित रहें

जीवन में हर समय बदलता रहता है ,पल पल‌ बदलने वाले इस जीवन‌ के साथ कैसे सामंजस्य बिठाए ,बहुत बड़ी दुविधा है । छोटी छोटी बातें कभी बहुत बड़ी खुशी दे जाती हैं , कभी तनाव , खुशी को हम एंजॉय कर लेते हैं , परंतु तनाव हर व्यक्ति सहन कर लें ,यह हर इंसान के वश में नहीं । तनाव यूं ही नहीं एकाएक हमारे जीवन में प्रवेश कर जाता है इसके दरवाजे हम खुद ही खोलते हैं , हमारे भीतर दिमाग में हर पल चलने वाली प्रक्रिया हमें हर पल संकेत भेजती है ,अच्छे बुरे का बौध करवाती रहती है ,अब यह हमारे विवेक पर निर्भर करता है कि हम उन्हें कैसे आत्मसात् करते हैं , बुरा भूलना पड़ता है अच्छा याद रखना पड़ता है । मन को एकाग्र रखना जो कि एक जटिल प्रक्रिया है उसे निरंतर अभ्यास करके उसमें महारत हासिल करनी पड़ती है ।
तनाव रहित जीवन जीने के लिए कभी भी अपने बचपन को नहीं भूलना चाहिए , पुराने सहपाठीयों से मुलाकात , उनके साथ बिताए वो दिन उनके साथ शेयर करने से जीवन में नया जोश एवं स्फुर्ती प्रदान करते हैं ।
भाई बहनों के साथ की गई मस्ती कभी की गई नोंक झोंक भी याद आने पर दिल को गुदगुदाती है ।
मां बाप का स्नेह एवं दुलार भी आपको तनाव रहित रखने में मदद करता है ।
तनाव आज के माहौल में फ़ैल रहा सबसे ख़तरनाक विष है ,व्यपार  के उतार चढ़ाव भी एक कारण हो सकते हैं , कुछ चीजें हमारे वश में नहीं होती उनको समय पर छोड़ देना चाहिए , कहते हैं हरदम समय एकसा नहीं रहता ,हर रात के बाद सवेरा आता है ।
कभी भी प्रस्थितियों के गुलाम मत बनो ।
आज जिस प्रकार प्राकृति अपने पुराने दिनों को लौटाने की मशक्कत कर रही है जैसे की हवा , पानी , वायु को स्वच्छ करने में निस्वार्थ भाव से लगी है  जरा सोचो किस के लिए , प्रकृति का इस सब में उसका अपना कोई स्वार्थ नहीं है वो सब हम लोगों के लिए ही कर रही है ।
ना जाने कितने सालों में हमने हर वो चीज़ जो हमारी नहीं थी प्रकृति की थी उसको मैला किया , अपने लिए जो अमृत हमें जीवन में मिला उसको विषाक्त करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी ।
पवित्र एवं निरोगी काया को हमने बिमारियों का घर बना कर छोड़ दिया ।
हर वो चीज जो हमें अपने भगवान , अल्ल्लाह , वाहेगुरु एवं जीसस क्राइस्ट से मिली उसका आकार इतना बुरा बना दिया कि आज वो सब भी दुखी हैं कि आखिर ये सब इंसान के दिमाग में घुसा ।
" तनाव के सिवाय हमने क्या पाया "
कोरोना एक पड़ाव है सोचने समझने का , जीवन को एक बार फिर से व्यवस्थित करने का ,काम ,क्रोध ,लोभ , मोह को त्याग कर , अपने अपने भगवान से क्षमा मांगने का ।
इसके बाद फिर ना जाने आपको इस जीवन में दुबारा मौका मिले या ना मिले ।
आपका 
प्रदीप .....

Thursday, April 16, 2020

देश प्रेम

राष्ट्र धर्म सबसे बड़ा है ,हम सबको मिलकर हमारे देश को सशक्त बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए ।आज देश में अराजक तत्वों का बोलबाला है उनके दिमाग में दिमक लग चुका है , अपने सोचने समझने की शक्ति का भक्षण कर चुके हैं । इन लोगों के पास ना कोई अपना विचार है ना कोई बुद्धिमानी वाला नजरिया , ये सिर्फ और सिर्फ बगावती तेवरों के साथ अपनी कौम को नुक्सान पहुंचाने वाले काम कर रहे हैं । इंसान की जिंदगी इनके लिए कोई मायने नहीं रखती ।
प्यार ,ममता , इंसानियत जैसे शब्दों पर ना इनको कोई समझ है आखिर कब तक एक दूसरे का रक्त पी कर अपनी प्यास बुझाते रहेंगे । धर्म का इनको ज्ञान नहीं ,कर्म का इनको पता नहीं , व्यवहार का , दूसरों के सम्मान का और अपने हो रहे अपमान का इनको कोई अहसास नहीं । असुरक्षित महसूस कर रहे हैं बच्चे से लेकर बूढ़े तक , महिलाओं को ढाल बनाकर देश का माहौल बिगाड़ने पर तूले हैं ।कोई मसीहा मोहब्बत का पैगाम कब लाएगा जो इन भटके हुए लोगों को राह दिखाएगा । ये बताएगा कि देश प्रेम से बढ़कर कुछ नहीं है । आप तभी तक सुरक्षित हैं जब तक आपका देश सुरक्षित है ।
आज देश गहरे संकट से गुजर रहा है , देश को सबके साथ की जरूरत है अफवाहों पर ध्यान ना देते हुए देश के शीर्ष नेतृत्व पर विश्वास करते हुए अपने आप को और देश को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अपना पूरे दिल और दिमाग से सहयोग करें । बाहर के दुश्मनों से लोहा लिया जा सकता है  लेकिन भीतरघात का मुक़ाबला कठिन होता है । हम सब एक देश के एक परिवार है अपनी पूरी सामर्थ्य से सब एक जूट हो कर उन ताकतों को पहचानने की कोशिश करें जो हमें अंदर से खोखला करना चाहती हैं । बाहरी या भीतरी दुश्मनों को मिल कर ऐसी सजा दें कि फिर कभी हमें कमजोर करने की कोशिश ना करें ।
जय भारत !!

Wednesday, April 15, 2020

आज का विचार





क्यापता था इंसान को एक दिन घर में कैद होना पड़ेगा । अवसर है आपके लिए खुद को समझने का परखने का उन खट्टे मीठे अनुभवों को फिर से जीने का बचपन में लौट जाने का,या वो कोई ऐसा काम जिसे चाहने पर   भी नहीं कर पा रहे थे उसे करने का ,ना अब समय का कोई बहाना है , कभी कोई खुद से किया वायदा पूरा करने का , पुरानी पड़ चुकी परंपराओं पर पड़ चुकी धूल को साफ करने का ,रिश्तों पर पड़ी बर्फ को पिघलाने का ,यह समय  सौ साल में कभी कभार ही मिलता है
 अपने द्वारा किए गए अच्छे बुरे कामों का आंकलन किजिए । अपनी कुछ कमियों को दूर करने की कोशिश किजिए । अपनी पत्नी एवं बच्चों को पूरा समय एवं प्यार दिजिए । पुराने दोस्त जो कहीं राह में बिछुड गए थे उनको अपने सोशल मीडिया के माध्यम से खोजने की कोशिश किजिए। इतना सब करने के लिए अब जो वक्त मिला है उसका भरपूर फायदा उठाइए ।
     ऐसा करने से आप अपने आप को व्यस्त रखकर अपना , अपने परिवार का एवं अपने देश का भला कर सकते हैं ।कोरोना को तो जाना ही है इस दौरान हम इस समय का सदुपयोग कर के आने वाले जीवन को जीवंत एवं खुशहाल बना सकते हैं ।

यह मेरा प्रथम प्रयास है अपनी सोच अपने विचार आप सभी से सांझा कर रहा हूं ।
आप के साथ और सुझाव मुझे मेरे आगे के मार्ग को प्रशस्त करेंगे ।